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देश सेवा देवत्व मेहनत-आलस मानवीय संवेदन ही देव रूप है। भाषा तू ही है अडिग हम खुद ही हैं ईश्वरीय विधान अलग हैं इंसानियत ही ईश्वरत्व होता है मनाना हैं माँ ही जीवन मित्रता न्याय-दया भाव तू ही का पर्व बदल देते ऐसी ही एक हिन्दी मातृभाषा हैं अपना देश

Hindi संवेदन सेवक ही देवत्व देते हैं Quotes